Poems from India
Saturday, May 24, 2008
मैखाना
मैखाने मी आज चाई है मस्ती
ऐ सकी मेरे मस्त हो के पिला
न तोल के पिला, न मोल के पिला
आज तू मुझे दिल खोल के पिला
टुटा दिल ले कर तेरे डर पे आए है हम
कुछ कर, तू इसे जोड़ के पिला
कहीं ये तुझ पे जान देने को मजबूर न कर दे
तू इसे सेहला , पर समझा के पिला
आज तू मुझे दिल खोल के पिला
कमी नहीं तेरे डर पे नशे की
पैमाना नही तो नजर से पिला
परिस्तिश को तेरे सर बहुत हैं
पर इस सर को नजर से उठा के पीला
आज तू मुझे दिल खोल के पिला
ये दुनिया है बद्बख्त एक तमाशा
इस तमाशे को तू मैं मे घोल के पिला
लाभों को मेरे तरसती है बोतल,
न पियों, तो लाभ का हवाला दे के पीला
ऐ सकी मेरे दिल खोल के पिला
..... हिंद्कवि
ऐ सकी मेरे मस्त हो के पिला
न तोल के पिला, न मोल के पिला
आज तू मुझे दिल खोल के पिला
टुटा दिल ले कर तेरे डर पे आए है हम
कुछ कर, तू इसे जोड़ के पिला
कहीं ये तुझ पे जान देने को मजबूर न कर दे
तू इसे सेहला , पर समझा के पिला
आज तू मुझे दिल खोल के पिला
कमी नहीं तेरे डर पे नशे की
पैमाना नही तो नजर से पिला
परिस्तिश को तेरे सर बहुत हैं
पर इस सर को नजर से उठा के पीला
आज तू मुझे दिल खोल के पिला
ये दुनिया है बद्बख्त एक तमाशा
इस तमाशे को तू मैं मे घोल के पिला
लाभों को मेरे तरसती है बोतल,
न पियों, तो लाभ का हवाला दे के पीला
ऐ सकी मेरे दिल खोल के पिला
..... हिंद्कवि
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