Poems from India

Tuesday, November 3, 2015

Poison

तेरे नाम का ज़ेहर पिला रहे है साकी !
ए हिन्द , कहीं फ़ूल तो नहीं रही तेरी छाती !

थोड़ी में भी मिलावट कर लूं ,
कुछ आंसू , कुछ माफ़ी ,कुछ झप्पिया भर लूँ !!


हिन्दकवि

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posted by Masood at 8:34 PM

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